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नीतीश कुमार बिहार में सुशासन और सामाजिक न्याय के शिल्पकार

नीतीश कुमार का सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन भारतीय राजनीति विशेष रूप से बिहार के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल का प्रतीक है एक कुशल इंजीनियर से एक अनुभवी राजनेता बनने तक का उनका सफर समाजवादी आदर्शों व्यावहारिक शासन और गठबंधन की जटिल राजनीति का एक मिश्रण रह है उनके कार्यों का मूल्यांकन करने के लिए उनके प्रारंभिक राजनीतिक करियर केंद्र सरकार में उनकी भूमिका और बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में उनके दीर्घकालिक और बहुआयामी शासन को समझना आवश्यक है।

राजनीतिक जीवन का उदय और केंद्र में भूमिका

नीतीश कुमार के राजनीतिक करियर की शुरुआत 1970 के दशक में जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से हुई यह वह काल था जिसने बिहार को लालू प्रसाद यादव रामविलास पासवान और शरद यादव जैसे कई प्रभावशाली समाजवादी नेता दिए जेपी आंदोलन ने उन्हें जमीनी स्तर की राजनीति और सामाजिक परिवर्तन की समझ दी अपने शुरुआती वर्षों में उन्होंने जनता दल के भीतर काम किया और 1985 में पहली बार बिहार विधानसभा के सदस्य बने उनकी संगठनात्मक क्षमता और प्रशासनिक कौशल ने उन्हें जल्दी ही राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाई 1989 में वे लोकसभा के लिए चुने गए और केंद्र की राजनीति में उनका प्रवेश हुआ।

केंद्रीय मंत्रालयों में योगदान

केंद्र सरकार में विभिन्न मंत्रालयों का नेतृत्व करते हुए नीतीश कुमार ने अपनी प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन NDA सरकार में उनकी भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।

रेल मंत्री के रूप में

दो बार रेल मंत्री का पद संभाला उनके कार्यकाल में सुरक्षा और आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया उन्होंने रेलवे में टिकट बुकिंग के डिजिटलीकरण और रेलवे लाइनों के विस्तार जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हालांकि 1999 में गैसल ट्रेन दुर्घटना के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था जिसने एक उच्च नैतिक मानदंड स्थापित किया।

कृषि और भूतल परिवहन

उन्होंने कृषि और भूतल परिवहन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली जहाँ उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए कई नीतियों की नींव रखी केंद्र सरकार के इन अनुभवों ने उन्हें राज्य के व्यापक विकास के लिए एक प्रशासनिक विज़न दिया।

बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में परिवर्तनकारी शासन

2005 में जब नीतीश कुमार ने पहली बार भारतीय जनता पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन में बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला तब राज्य की स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी बिहार को अक्सर देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता था जहाँ जंगल राज का बोलबाला था और विकास के संकेतक निराशाजनक थे नीतीश कुमार ने सुशासन बाबू की छवि के साथ राज्य में एक नई राजनीतिक संस्कृति स्थापित करने का प्रयास किया उनका शासनकाल तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित था कानून का शासन बुनियादी ढाँचा और समावेशी विकास और सामाजिक न्याय एवं महिला सशक्तिकरण।

कानून और व्यवस्था की बहाली

सुशासन का आधार नीतीश कुमार के शासन की सबसे पहली और महत्वपूर्ण उपलब्धि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार लाना था उन्होंने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई और भय के माहौल को समाप्त करने के लिए निर्णायक कदम उठाए।

त्वरित सुनवाई

उन्होंने अदालतों के साथ समन्वय स्थापित करके जघन्य अपराधों के मामलों में त्वरित सुनवाई शुरू करवाई इसका परिणाम यह हुआ कि कई कुख्यात अपराधियों को कम समय में सज़ा मिली और जेल भेजा गया इस कदम ने जनता के मन में न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन के प्रति विश्वास को बहाल किया।

पुलिस बल का आधुनिकीकरण

पुलिस बल में भर्ती और आधुनिकीकरण पर ध्यान दिया गया जिससे अपराध को नियंत्रित करने की क्षमता में वृद्धि हुई।

भ्रष्टाचार पर नियंत्रण

उन्होंने सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता लाने के लिए कदम उठाए सिविल सेवकों के लिए अपनी संपत्ति सार्वजनिक करना अनिवार्य किया गया यह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था इस सख्ती ने बिहार की छवि को अपराध ग्रस्त राज्य से बदलकर सुशासन वाले राज्य के रूप में स्थापित करने में मदद की।

बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व सुधार

बुनियादी ढांचे का विकास नीतीश कुमार के न्याय के साथ विकास मॉडल का केंद्रीय बिंदु था उनका मानना था कि कनेक्टिविटी के बिना विकास असंभव है।

सड़क क्रांति

उनके कार्यकाल में सड़कों के निर्माण में व्यापक प्रगति हुई ग्रामीण और शहरी सड़कों के नेटवर्क का विस्तार किया गया जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी गांव से मुख्य सड़क तक पहुंचना आसान हो बेहतर सड़कों ने न केवल यात्रा को आसान बनाया बल्कि किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुँचाने में भी मदद की जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिली।

बिजली आपूर्ति में सुधार

राज्य में बिजली की स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव लाया गया उन्होंने वादा किया था कि वह वोट मांगने तभी जाएंगे जब बिजली की स्थिति में सुधार होगा इस संकल्प के तहत उन्होंने बिजली उत्पादन और वितरण पर जोर दिया जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली की उपलब्धता बढ़ी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ।

हर घर नल का जल

उनके सात निश्चय कार्यक्रम के तहत हर घर नल का जल योजना शुरू की गई जिसका उद्देश्य हर घर तक पाइप से शुद्ध पेयजल पहुँचाना था यह ग्रामीण स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए एक महत्वपूर्ण योजना थी।

सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण एक विशिष्ट पहचान

नीतीश कुमार ने सामाजिक न्याय की परंपरागत परिभाषा को विस्तार दिया और अति पिछड़ा वर्ग EBC और महिलाओं को सशक्तिकरण के केंद्र में रखा यह उनकी राजनीति की एक विशिष्ट पहचान बन गया।

महिलाओं को आरक्षण

पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बना इस कदम ने महिलाओं को स्थानीय शासन में निर्णायक भूमिका निभाने का अवसर दिया जिससे उनकी सामाजिक और राजनीतिक चेतना में वृद्धि हुई।

मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना

यह योजना उनके शासन की सबसे सफल और अनुकरणीय पहलों में से एक रही नौवीं कक्षा की छात्राओं को स्कूल जाने के लिए साइकिल खरीदने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की गई इस योजना के कारण न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर में भारी कमी आई बल्कि माध्यमिक शिक्षा में उनका नामांकन भी काफी बढ़ गया इसने महिला शिक्षा और सशक्तिकरण को एक नया आयाम दिया।

प्रोफेशनल सेवाओं में भागीदारी

उन्होंने पुलिस भर्ती जैसी प्रोफेशनल सेवाओं में भी महिलाओं के लिए 35% आरक्षण सुनिश्चित किया जिससे सार्वजनिक सेवा में उनकी भागीदारी को बढ़ावा मिला।

अति पिछड़ा वर्ग (EBC) पर ध्यान

उन्होंने EBC को अलग से मान्यता दी और उनके लिए विशेष कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं जिससे सामाजिक और राजनीतिक रूप से वे सशक्त हुए।

सामाजिक सुधार और कल्याणकारी नीतियां

विकास को व्यापक बनाने के लिए नीतीश कुमार ने कई सामाजिक और कल्याणकारी कदम उठाए जिनका उद्देश्य समाज के सबसे निचले तबके तक सरकारी लाभ पहुँचाना था।

शराबबंदी

2016 में उन्होंने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की। उनका तर्क था कि शराबबंदी से घरेलू हिंसा में कमी आएगी परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और महिलाओं का जीवन सुरक्षित होगा हालाँकि इस नीति को कार्यान्वयन की चुनौतियों और अवैध शराब के व्यापार जैसे मुद्दों पर आलोचना का सामना करना पड़ा है लेकिन सामाजिक बदलाव के इरादे से यह एक साहसी कदम था।

जीविका कार्यक्रम

यह ग्रामीण आजीविका संवर्धन के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना थी जिसके तहत बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया इस कार्यक्रम ने लाखों महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद की और यह आज भी बिहार में ग्रामीण सशक्तिकरण का एक बड़ा उदाहरण है।

सात निश्चय विज़न

अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने सात प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित एक व्यापक विकास एजेंडा पेश किया आर्थिक हल युवाओं को बल आरक्षित रोज़गार महिलाओं का अधिकार हर घर बिजली लगातार हर घर नल का जल घर तक पक्की गली नालियां शौचालय निर्माण घर का सम्मान और अवसर बढ़े आगे पढ़ें यह एक समग्र विकास की रूपरेखा थी राजनीतिक गठबंधन की जटिलताएँ और लचीलापन नीतीश कुमार के राजनीतिक करियर का एक विवादास्पद लेकिन निर्णायक पहलू गठबंधन की राजनीति में उनका लचीलापन रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन NDA और राष्ट्रीय जनता दल RJD के नेतृत्व वाले महागठबंधन के बीच कई बार पाला बदला है।


2005 से 2013 तक उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर राज्य में ‘सुशासन’ की नींव रखी।


2015 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने बीजेपी के विरोध में लालू प्रसाद यादव के RJD और कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाया और बड़ी जीत हासिल की।

वापसी


हालांकि उन्होंने 2017 और फिर 2024 में अंतरात्मा की आवाज या सिद्धांतों का हवाला देते हुए बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA में वापसी की उनके इस राजनीतिक लचीलेपन ने उन्हें आलोचकों से पलटू राम की उपाधि भी दिलाई है लेकिन यह उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता और बिहार के जातीय-सामाजिक समीकरणों में उनकी महत्वपूर्ण स्थिति को भी दर्शाता है यह दर्शाता है कि बिहार की राजनीति में वे एक ऐसे किंगमेकर हैं जिनके बिना कोई भी गठबंधन आसानी से सत्ता हासिल नहीं कर सकता उनका वोट आधार विशेष रूप से EBC और महिलाओं के बीच उन्हें एक अनिवार्य भागीदार बनाता है।

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