बिहार की राजनीति हमेशा से जटिल और बहुआयामी रही है जातिगत समीकरण क्षेत्रीय हित और सामाजिक परतें चुनावी परिदृश्य को लगातार प्रभावित करती हैं 2025 के विधानसभा चुनावों में विपक्षी INDIA BLOC की चुनौती यह है कि वह NDA को कड़ी टक्कर दे और सत्ता परिवर्तन के लिए मार्ग तैयार करे। INDIA BLOC में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) कांग्रेस वाम दल और कुछ क्षेत्रीय पार्टियाँ शामिल हैं इस गठबंधन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दल अपने बीच सीट शेयरिंग को संतुलित और समय पर पूरा कर सकें बिहार का चुनावी माहौल बहुआयामी होने के कारण गठबंधन की रणनीति अधिक जटिल बनती है।
गठबंधन में दलों की अपेक्षाएँ
INDIA BLOC में RJD का दबदबा सबसे अधिक है पिछले चुनावों में उसकी पकड़ मजबूत रही है और उसका प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों तथा पिछड़े वर्ग में अधिक है RJD इस बार चाहता है कि उसे गठबंधन में बड़ा हिस्सा मिले ताकि वह चुनावी रणनीति पर प्रभाव बनाए रख सके कांग्रेस भी गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है वह चाहती है कि उसे पर्याप्त सीटें मिलें ताकि संगठन और स्थानीय नेतृत्व मजबूत बने वाम दल और VIP जैसी पार्टियाँ यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि उनका अस्तित्व गठबंधन में दिखाई दे गठबंधन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है किसी भी दल की नाराजगी पूरे विपक्ष की ताकत को कमजोर कर सकती है।
सीट‑शेयरिंग पर चर्चा का आरंभ
बिहार विधानसभा चुनावों के लिए सीट शेयरिंग पर चर्चा पहले ही शुरू हो गई है कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति ने दिल्ली में बैठक कर RJD और अन्य दलों के साथ बातचीत शुरू की चर्चा का केंद्र बिंदु यह है कि कौन सी सीटें किस दल को मिलेंगी कांग्रेस ने लगभग साठ सत्तर सीटों की मांग रखी है वाम दल और VIP ने भी अपनी ताकत के अनुसार सीटों की मांग की है JMM ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उसे सम्मानजनक हिस्से नहीं मिले तो वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ सकती है।
RJD और कांग्रेस के बीच असमंजस
RJD और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर असमंजस स्पष्ट है कुछ सीटें ऐसी हैं जहाँ दोनों दलों की पिछली पकड़ मजबूत रही है दोनों ही दल चाहते हैं कि उनके उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जाए RJD चाहता है कि कांग्रेस कुछ सीटें छोड़ दे जबकि कांग्रेस मानती है कि अगर उसे कम सीटें मिलीं तो उसका वोट बैंक कमजोर होगा इस असमंजस के समाधान के लिए बातचीत जारी है लेकिन अंतिम निर्णय अभी तक नहीं आया।
वाम दलों और क्षेत्रीय पार्टियों की भूमिका
वाम दलों जैसे CPI CPI(ML) CPM ने गठबंधन के अंदर सीटों की मांग रखी है उन्होंने यह ध्यान रखा है कि उन्हें ऐसे क्षेत्र मिलें जहाँ उनका संगठन और वोट बैंक मजबूत हो VIP और JMM जैसी क्षेत्रीय पार्टियों ने भी अपनी ताकत के अनुसार सीटें मांगी हैं VIP विशेष रूप से उन जिलों में चुनाव लड़ना चाहती है जहाँ पिछले चुनावों में उसकी पकड़ रही JMM ने साफ संकेत दिया है कि यदि उसे सम्मानजनक हिस्से नहीं मिले तो वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ सकती है।
समय सीमा और रणनीतिक दबाव
गठबंधन पर समय का दबाव भी है नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवारों के चयन में देरी से प्रचार प्रभावित होगा JMM ने 14 अक्टूबर तक सीट शेयरिंग पर सहमति बनाने की समय सीमा तय की है समय की कमी के कारण अगर गठबंधन ने जल्दी निर्णय नहीं लिया तो उम्मीदवारों को प्रचार की तैयारी में मुश्किलें आएंगी संगठन को भी स्थानीय स्तर पर काम करना होगा ताकि मतदाताओं के बीच संदेश स्पष्ट पहुंचे।
संभावित प्रभाव और चुनावी परिणाम
अगर INDIA bloc सीट शेयरिंग में सफल होता है, तो NDA को चुनौती देना संभव है सही उम्मीदवारों का चयन संगठनात्मक तैयारी और क्षेत्रीय समीकरण गठबंधन की ताकत बढ़ा सकते हैं लेकिन अगर सीट विभाजन में असहमति रही तो गठबंधन कमजोर दिख सकता है मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा होगा और विपक्ष का संदेश कमजोर पड़ेगा विश्लेषकों के अनुसार बिहार की जनता यह देखेगी कि गठबंधन केवल विरोध ही नहीं बल्कि विकास और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर भी सक्रिय है तालमेल बना रहने पर इसका चुनाव परिणामों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
गठबंधन की निर्णायक भूमिका
बिहार विधानसभा चुनावों में विपक्षी INDIA bloc की भूमिका निर्णायक हो सकती है सीट शेयरिंग पर चर्चा यह दर्शाती है कि गठबंधन में तालमेल संतुलन और समय पर निर्णय कितना महत्वपूर्ण है RJD कांग्रेस वामदल और VIP जैसी पार्टियाँ यदि आपसी सहमति से काम करें तो विपक्ष को NDA को चुनौती देने का अवसर मिलेगा लेकिन स्वार्थ और देरी से गठबंधन कमजोर भी पड़ सकता है इस चुनाव में केवल उम्मीदवार और संगठन ही नहीं बल्कि गठबंधन की रणनीति समय प्रबंधन और जनता के बीच संदेश की स्पष्टता भी निर्णायक भूमिका निभाएगी।





