पंजाब में विनाशकारी बाढ़ ने हाहाकार मचा रखा है, इस राज्य को देश का अन्य भंडारण भी कहा जाता है जो आज इन दोनों भीषण बाढ़ से जूझ रहा है इस राज्य में बाढ़ के कारण अब तक लगभग 51 लोगों की मौत हो चुकी है। वहां के 15 जिलों में 4.56 लाख एकड़ फसल और लगभग 3.87 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। इस बुरी खबर के कारण प्रधानमंत्री मोदी पंजाब के गुरदासपुर में आ रहे हैं और वहां के बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण करेंगे।
पंजाब में लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों के उफान ने राज्य में त्राहि-त्राहि मचा दी है। इस बाढ़ की वजह से हजारों परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं। इस आपदा ने न केवल पंजाब के सामाजिक ढांचे को हिला दिया है, बल्कि आर्थिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी गहरी चोट पहुँचाई है। ऐसे कठिन समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कल का पंजाब दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। PM Modi गुरदासपुर में जाकर जमीनी स्तर पर हालात को देखेंगे और बड़े राहत पैकेज का ऐलान भी कर सकते हैं जिससे वहां के लोगों को खाने पीने का सामान और रहने का ठिकाना हो सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि NDRF, सेना, सीमा सुरक्षा बल, पंजाब पुलिस, और वहां की जिला प्रशासन द्वारा राहत और बचाव अभियान युद्ध स्तर पर चलाए जा रहा है क्योंकि वहां बाढ़ थोड़ा अधिक भी हुआ तो इन सुरक्षा के द्वारा उनकी मदद की जा सकेगी और स्थानीय लोगों को बाढ़ से बचाया जा सकेगा। 10 को में आई सबसे भीषण बाढ़ का सामना कर रहा है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के जल ग्रहण क्षेत्र में भारी वर्षा के कारण वहां की नदिया जैसे सतलुज, व्यास, और रवि नदियों तथा मौसमी नालो में जल का उफान चल रहा है और इसी उफान के कारण पंजाब अभी जलमग्न हुआ है।
हालांकि, पंजाब में हुई भारी बारिश ने वहां के स्थानीय लोगों की समस्या और गंभीर कर दी है जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किल और बढ़ गई है अधिकारियों ने यह भी बताया कि शनिवार को पोंग बांध का जलस्तर घटकर 1394 फुट दर्ज किया गया हालांकि यह भी इस बांध की अधिकतम सीमा है। शुक्रवार को बांध में पानी का प्रवाह 99673 क्यूसेक था जो घटकर 47162 क्यूसेक बच गया। जबकि इस जल की निकासी 99673 क्यूसेक पर बनी रही भाखड़ा बांध का जलस्तर शनिवार को 1678.14 फुट दर्ज किया गया था जो शुक्रवार को 1678.47 फुट था। राज्य के वित्त मंत्री ने बाढ़ को 5 दशकों में सबसे भीषण बताया है उन्होंने बताया कि पंजाब और पड़ोसी पहाड़ी राज्यों में लगातार हुई बारिश में व्यापक तबाही मचाई है जिससे सभी जिले को मिलाकर लगभग 2000 से अधिक का प्रभावित हुए हैं। यह भी जानकारी बताया गया है की सबसे अधिक मौत होशियारपुर और अमृतसर से हुई है दोनों स्थान पर लगभग 7-7 लोगों की मौत हुई है।
बाढ़ की पृष्ठभूमि और प्राकृतिक आपदा की वजह
पंजाब में इस बार मानसून सामान्य से कहीं अधिक सक्रिय रहा। कुछ ही दिनों में राज्य के कई हिस्सों में सामान्य से दोगुनी बारिश दर्ज की गई। सतलुज, ब्यास और रावी नदियाँ अपने उफान पर पहुँच गईं। इनके किनारे बसे गाँव सबसे पहले प्रभावित हुए। जलभराव और लगातार हो रही बारिश ने निचले इलाकों को झीलों में तब्दील कर दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित शहरीकरण भी इस संकट को गहरा करने वाले कारणों में से हैं। जब प्राकृतिक जलधाराओं पर निर्माण होता है और जलनिकासी की व्यवस्था बाधित होती है, तो थोड़ी सी अतिरिक्त बारिश भी बाढ़ में बदल जाती है।
जनहानि और लोगों की पीड़ा
अब तक 48 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इनमें कई बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। कई लोगों की मौत दीवार गिरने, करंट लगने और पानी में डूबने से हुई। हजारों लोग घायल हैं और अस्पतालों में भीड़ बढ़ गई है।
लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है सुरक्षित ठिकाना। गाँवों में पानी भर जाने से लोग अपने घरों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हुए। कई परिवारों ने रातें खुले आसमान के नीचे काटीं। महिलाओं और बच्चों की स्थिति बेहद दयनीय है। राहत शिविरों में जगह की कमी और संसाधनों की दिक्कत से हालात और गंभीर हो गए हैं।
सेना और एनडीआरएफ की तैनाती
स्थिति की भयावहता को देखते हुए भारतीय सेना और एनडीआरएफ को तुरंत मोर्चे पर लगाया गया। सेना के जवान नावों के सहारे लोगों को निकाल रहे हैं। वायुसेना के हेलिकॉप्टर लगातार राहत सामग्री पहुँचा रहे हैं और फँसे हुए लोगों को एयरलिफ्ट कर रहे हैं।
एनडीआरएफ की टीमों ने कई गाँवों से सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला है। राहत शिविरों में खाने-पीने का सामान, दवाइयाँ और कपड़े पहुँचाए जा रहे हैं। डॉक्टरों की टीम भी लगातार स्वास्थ्य सेवाएँ दे रही है। इस बचाव अभियान में स्थानीय पुलिस और प्रशासन भी पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी का कल का दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल पंजाब पहुँचेंगे। वह प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे और स्थानीय प्रशासन व सेना अधिकारियों से हालात की जानकारी लेंगे। इस दौरे से लोगों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार राहत पैकेज की घोषणा करेगी और मुआवज़ा राशि जल्द जारी होगी।
पीएम मोदी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। विपक्ष पहले ही सरकार पर लापरवाही के आरोप लगा चुका है। ऐसे में प्रधानमंत्री की मौजूदगी यह संदेश देगी कि केंद्र सरकार राज्य के साथ खड़ी है।
किसानों की तबाही और कृषि संकट
पंजाब की पहचान उसके खेत-खलिहानों से है। धान की फसल जो कटाई के लिए तैयार हो रही थी, वह पूरी तरह डूब चुकी है। हजारों एकड़ भूमि पर पानी भरा हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस आपदा से किसानों को हजारों करोड़ का नुकसान होगा।
किसान पहले ही महंगाई और कर्ज के बोझ से दबे हैं। अब इस बाढ़ ने उनकी कमर तोड़ दी है। अगर समय पर मुआवज़ा और बीमा क्लेम नहीं मिला तो आत्महत्या की घटनाएँ बढ़ सकती हैं। किसानों ने सरकार से तत्काल मदद की गुहार लगाई है।
राहत शिविरों की स्थिति
राज्य सरकार ने हजारों लोगों के लिए राहत शिविर बनाए हैं। लेकिन इन शिविरों में भीड़ बहुत ज्यादा है। जगह-जगह लोग टेंट और अस्थायी शेल्टर में रह रहे हैं। साफ पानी और स्वच्छता की कमी से बीमारियाँ फैलने का खतरा है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाएँ सबसे बड़ी चिंता बनी हुई हैं। डॉक्टरों की टीमें लगातार काम कर रही हैं, लेकिन मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा है कि सभी को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा।
भविष्य की राह और सबक
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब को अब अपने जल प्रबंधन ढांचे को पूरी तरह से नया स्वरूप देना होगा।
नदियों के किनारे बाँध और तटबंध मजबूत किए जाएँ।
जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। बाढ़ की स्थिति की पूर्व चेतावनी देने वाली तकनीक अपनाई जाए।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजना बने। अगर ऐसा नहीं हुआ तो भविष्य में हर साल बाढ़ का संकट और भी बड़ा रूप ले सकता है।


