भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवरात्र के शुभ अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और आज के ही दिन से नए जीएसटी रिफॉर्म्स को जीएसटी बचत उत्सव बताया। और उन्होंने अपने देशवासियों को यह जानकारी दिया कि नए GST रिफॉर्म्स से किसान, महिला, युवा, गरीब, मध्यम वर्ग,व्यापारी, लघु उद्योग तथा इससे संबंधित अन्य वर्ग में भी फायदा होगा। पीएम मोदी ने अपने देशवासियों को स्वदेशी वस्तु अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे देश के युवाओं के लिए रोजगार पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवरात्र के पहले दिन अपने देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए काहे की यह त्यौहार सभी के जीवन में सुख और समृद्धि लेकर आएगा तथा देश के नाम पर एक पत्र लिखें। 22 सितंबर 2025 से लागू जीएसटी दरों की कटौती को पीएम ने ‘GST बचत उत्सव’ बताया। 2 सितंबर से नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी रिफॉर्म लागू होने के साथ ही पूरे देश में ‘GST बचत उत्सव’ की शुरुआत हो गई है।
हेल्थ इंश्योरेंस पर अब GST शून्य
पीएम ने उसे पत्र में आगे यह लिखा कि नई जीएसटी नियम में अब मुख्य रूप से सिर्फ दो ही स्लैब रहेंगे प्रत्येक दिन की जरूरी चीजें जैसे की खाना, दवाइयां, साबुन, टूथपेस्ट और अन्य वस्तुओं पर टैक्स फ्री होंगे या 5% की सबसे कम स्लैब में आएंगे। अब अपने मनपसंद कार्य को करने में जैसे घर बनाने, गाड़ी खरीदने, बाहर खाने या परिवार के साथ छुट्टियां मनाने जैसे सपनों को पूरा करना अब आसान होगा। हेल्थ इंश्योरेंस पर भी अब GST को शून्य कर दिया गया है।’
स्वदेशी अपनाने की अपील
मोदी जी ने आगे लिखा कि नागरिक देवो भव हमारा मंत्र है। पिछले 11 वर्षों में हमारे प्रयासों से 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। पूरे देश भर में एक नियो मिडिल क्लास तैयार हुआ है। हमने मध्यम वर्ग को भी मजबूत किया है। 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लिया जा रहा है। स्वदेशी अपनाने को बोलते हुए उन्होंने लिखा कि जब भी आप अपने देश के कारीगरों, श्रमिकों और इंडस्ट्री के बनाए सामान को खरीदते हैं, तो आप कई परिवारों की रोजी-रोटी में मदद करते हैं और देश के युवाओं के लिए रोजगार पैदा करते हैं।
भारत की आर्थिक संरचना में सुधार करते हुए बीते कुछ वर्षों में कई बड़े कदम उठाए गए हैं। इन कदमों में सबसे अहम सुधार रहा है वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों के नाम पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि जीएसटी केवल कर प्रणाली को सरल बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत अभियान की रीढ़ है। उनका मानना है कि कर व्यवस्था जितनी पारदर्शी और स्थिर होगी, उतनी ही तेजी से भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी जगह मजबूत करेगा।
प्रधानमंत्री के पत्र का उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि जीएसटी सुधारों ने कैसे भारत के छोटे व्यापारियों, उपभोक्ताओं, निवेशकों और उद्योगपतियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। यह पत्र आत्मनिर्भर भारत अभियान को दिशा और गति देने वाले उस विजन की झलक भी प्रस्तुत करता है, जिसे लेकर भारत 21वीं सदी में अपनी आर्थिक पहचान गढ़ रहा है।
जीएसटी सुधारों की पृष्ठभूमि
भारत में स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक कर प्रणाली बेहद जटिल रही। अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग टैक्स नियम, केंद्र और राज्य के करों में असमानता, कई स्तरों पर लगने वाले कर, उपभोक्ताओं पर बोझ और व्यापारियों की उलझन—ये सब भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे थे। इसी पृष्ठभूमि में जीएसटी को “वन नेशन, वन टैक्स” के विजन के साथ 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया।
जीएसटी के शुरुआती दौर में कई कठिनाइयाँ सामने आईं। व्यापारियों को ऑनलाइन रिटर्न फाइलिंग की आदत डालनी पड़ी, राज्यों ने राजस्व हानि को लेकर चिंता जताई, और छोटे उद्योगों ने टैक्स बोझ बढ़ने की शिकायत की। लेकिन समय के साथ-साथ सुधार किए गए और जीएसटी परिषद ने लगातार बदलावों के जरिए इसे ज्यादा सरल और व्यावहारिक बनाया। यही सुधार आज आत्मनिर्भर भारत अभियान की गति का स्रोत बन रहे हैं।
पीएम मोदी का देश के नाम पत्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पत्र में साफ कहा कि जीएसटी केवल टैक्स सुधार नहीं, बल्कि एक ऐसा आर्थिक क्रांतिकारी कदम है जिसने भारत की आर्थिक संरचना को आधुनिक युग के लिए तैयार किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईमानदार करदाताओं को सम्मान मिल रहा है और डिजिटल इंडिया के सपने को जीएसटी ने और मजबूती दी है।
उन्होंने उल्लेख किया कि जीएसटी लागू होने के बाद करदाताओं की संख्या दोगुनी हुई है। पहले जहाँ टैक्स बेस सीमित था, वहीं अब लाखों नए व्यापारी औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने हैं। इससे न केवल सरकार का राजस्व बढ़ा है बल्कि देश में वित्तीय अनुशासन भी आया है। पीएम मोदी ने इसे “आत्मनिर्भर भारत” की ओर बढ़ते कदमों का आधार बताया।
आत्मनिर्भर भारत अभियान और जीएसटी सुधारों का रिश्ता
आत्मनिर्भर भारत अभियान का मूल उद्देश्य है भारत को उत्पादन, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना। प्रधानमंत्री ने कई बार कहा है कि “लोकल को ग्लोबल” बनाने से ही भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ पाएगा। जीएसटी सुधार इस लक्ष्य को कई स्तरों पर गति देते हैं।
छोटे और मझोले उद्योग आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ हैं। जब टैक्स व्यवस्था सरल और पारदर्शी होती है, तो इन उद्योगों को विस्तार का अवसर मिलता है। कंपोज़िशन स्कीम और छोटे व्यापारियों के लिए रिटर्न दाखिल करने की सरल प्रक्रिया ने उन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने का काम किया है। यही उद्योग आगे चलकर आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे।
दूसरा पहलू है विदेशी निवेश। दुनिया भर के निवेशक ऐसी अर्थव्यवस्था में निवेश करना चाहते हैं जहाँ कर प्रणाली स्थिर और स्पष्ट हो। जीएसटी सुधारों ने भारत को ऐसा वातावरण दिया है। परिणामस्वरूप भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का आकर्षण केंद्र बन रहा है।


