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लखनऊ स्थित ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण

लखनऊ स्थित ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण सुविधा से पहला जत्था 18 अक्टूबर को रवाना

भारत की रक्षा नीति में आत्मनिर्भरता Bharat का जो नारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया था वह अब धरातल पर वास्तविकता का रूप ले रहा है लखनऊ में स्थित ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण सुविधा इसी आत्मनिर्भर भारत अभियान की सबसे बड़ी तकनीकी उपलब्धियों में से एक है यह सुविधा भारतीय रक्षा उद्योग के लिए मील का पत्थर साबित होने जा रही है इस निर्माण इकाई से पहला जत्था 18 अक्टूबर 2025 को रवाना होने वाला है जिसकी जानकारी मिलते ही पूरे देश में उत्साह का माहौल है।

ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना की पृष्ठभूमि

ब्रह्मोस मिसाइल का नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा से मिलकर बना है यह मिसाइल भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित की गई है यह परियोजना 1998 में प्रारंभ हुई थी और इसका उद्देश्य था भारत को सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना
ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत उसकी गति सटीकता और विध्वंसक क्षमता है यह दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में से एक है जो मैक 2.8 से मैक 3 तक की गति प्राप्त कर सकती है यह मिसाइल स्थलीय नौसैनिक और हवाई तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च की जा सकती है।

लखनऊ ब्रह्मोस यूनिट की स्थापना

रक्षा मंत्रालय ने 2021 में लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण सुविधा की नींव रखी थी यह इकाई उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे UP Defence Corridor का हिस्सा है इस परियोजना को लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है इस सुविधा में ब्रह्मोस मिसाइल के कई महत्वपूर्ण घटक जैसे प्रोपल्शन सिस्टम लॉन्चर यूनिट और कंट्रोल मॉड्यूल यहीं तैयार किए जाते है इसके अलावा यहां टेस्टिंग इंटीग्रेशन और फाइनल असेंबली की भी सुविधा मौजूद है।

रक्षा मंत्री की भूमिका और 18 अक्टूबर का महत्व

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जो स्वयं लखनऊ के सांसद भी हैं इस परियोजना के प्रणेता माने जाते हैं उन्होंने इस यूनिट की स्थापना के लिए न केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई बल्कि इसके लिए आवश्यक सभी मंज़ूरियाँ भी तेज़ी से दिलवाईं 18 अक्टूबर 2025 को जब इस सुविधा से पहला जत्था रवाना होगा तब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह स्वयं कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे यह जत्था भारतीय सशस्त्र बलों के लिए तैयार किए गए ब्रह्मोस मिसाइल के उन्नत संस्करणों को लेकर रवाना होगा।

मेक इन इंडिया और मेक इन यूपी की सफलता

लखनऊ की यह यूनिट सिर्फ तकनीकी दृष्टि से ही नहीं बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी एक बड़ा कदम है यह मेक इन इंडिया और मेक इन यूपी दोनों अभियानों की सफलता का प्रतीक है इससे उत्तर प्रदेश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और राज्य भारत का रक्षा निर्माण केंद्र बनता जा रहा है इस परियोजना के कारण हजारों युवाओं को रोजगार मिला है।

तकनीकी विशेषताएँ और उन्नत संस्करण

लखनऊ यूनिट में निर्मित मिसाइलें ब्रह्मोस के नवीनतम संस्करणों पर आधारित हैं जिन्हें ब्रह्मोस NG नेक्स्ट जेनरेशन कहा जाता है यह पारंपरिक ब्रह्मोस की तुलना में हल्की तेज़ और अधिक घातक हैं इसका वजन लगभग 1.5 टन कम है और इसे हल्के लड़ाकू विमानों जैसे तेजस में भी फिट किया जा सकता है इस तकनीक की बदौलत भारत न केवल अपनी रक्षा क्षमता बढ़ा रहा है बल्कि अन्य देशों को भी निर्यात की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

रोजगार और स्थानीय विकास

इस यूनिट के चालू होने से लखनऊ और आसपास के इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं रक्षा क्षेत्र से जुड़े इंजीनियरिंग इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों को यहां काम का अवसर मिल रहा है स्थानीय उद्योगों को भी अप्रत्यक्ष रूप से फायदा होगा क्योंकि कई पुर्ज़े और सप्लाई स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे हैं इससे वेंडर डेवलपमेंट और एमएसएमई सेक्टर को भी बल मिलेगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की स्थिति

ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है फिलीपींस को पहले ही भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात की है और अन्य एशियाई देशों से भी कई अनुबंधों पर बातचीत जारी है लखनऊ यूनिट से बने मिसाइल पार्ट्स भविष्य में निर्यात बाजार की आपूर्ति को और मज़बूती देंगे इससे भारत रक्षा निर्यातक राष्ट्र के रूप में और अधिक मज़बूत स्थिति में पहुंचेगा।

सामरिक दृष्टि से लाभ

भारत के लिए ब्रह्मोस मिसाइल सिर्फ एक हथियार नहीं बल्कि एक रणनीतिक संपत्ति है यह देश की सर्जिकल स्ट्राइक क्षमता को और बढ़ाती है तथा पड़ोसी देशों के लिए एक सशक्त संदेश देती है लखनऊ यूनिट से उत्पादन बढ़ने पर भारतीय सेना नौसेना और वायुसेना की ज़रूरतों को तेजी से पूरा किया जा सकेगा जिससे भारत की सामरिक तैयारी और बेहतर होगी।

आत्मनिर्भर भारत का मजबूत स्तंभ

इस परियोजना से यह साफ है कि भारत अब रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता प्रधानमंत्री मोदी का आत्मनिर्भर भारत का नारा अब ठोस धरातल पर उतर चुका है लखनऊ यूनिट इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है जहां पूरी तकनीक उत्पादन प्रक्रिया और प्रबंधन भारतीय हाथों से किया जा रहा है।

भविष्य की संभावनाएँ

रक्षा मंत्रालय की योजना है कि आने वाले वर्षों में लखनऊ यूनिट की उत्पादन क्षमता को दोगुना किया जाए। इसके अलावा ब्रह्मोस मिसाइल के समुद्री और हवाई संस्करणों पर भी यहां अनुसंधान किया जाएगा
भविष्य में यह सुविधा न केवल भारत के लिए बल्कि सहयोगी देशों के लिए भी टेक्नोलॉजी हब बन सकती है।

निष्कर्ष

लखनऊ स्थित ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण सुविधा से 18 अक्टूबर को पहला जत्था रवाना होना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता यात्रा का ऐतिहासिक क्षण है यह सिर्फ एक मिसाइल नहीं बल्कि देश की वैज्ञानिक क्षमता तकनीकी कौशल और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पहल उत्तर प्रदेश सरकार का सहयोग और वैज्ञानिकों की मेहनत ने मिलकर भारत को उस मुकाम पर पहुंचाया है जहाँ से वह न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करेगा बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपने कौशल का लोहा मनवाएगा यह क्षण न सिर्फ लखनऊ के लिए बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का विषय है।

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